जन्मकुंडली के 12 भावों के माध्यम से व्यक्तित्व, संबंध, करियर, धन, जीवन-दर्शन और जीवन के विभिन्न आयामों को समझने की एक व्यवस्थित दृष्टि।
अधिकतर पाठक भावों के अलग-अलग अर्थ सीख लेते हैं — पहला भाव यह, सातवाँ भाव वह। लेकिन जब पूरी कुंडली सामने आती है, तो उलझन शुरू होती है: इन बारह अर्थों को आपस में जोड़कर कोई ठोस बात कैसे कही जाए?
यह पुस्तक उसी उलझन से निकली है। यह सूचियाँ नहीं, विधि सिखाने की कोशिश करती है — इस समझ के साथ कि कोई भी भाव अकेले पूरी बात नहीं बताता।
“कुंडली को 12 अलग-अलग भावों की सूची की तरह नहीं, बल्कि एक जुड़ी हुई जीवन-कथा की तरह समझना सीखिए।”
“सिर्फ ‘क्या’ नहीं — ‘क्यों’ और ‘कैसे’ को समझने की कोशिश।” यही परत-दर-परत देखने की पद्धति पूरी पुस्तक की आत्मा है।
हर भाव एक प्रश्न है — और हर प्रश्न बाक़ी कुंडली से जुड़ा हुआ है।
कुंडली क्या है, बारह की संख्या का अर्थ, राशि–भाव–लग्न का अंतर, एक भाव को पढ़ने का मूल सिद्धांत, और चार पुरुषार्थ।
प्रथम से द्वादश तक हर भाव क्रमशः — और हर अध्याय जान-बूझकर सामने वाले भाव, स्वाभाविक कारकों और बड़ी वर्गीकरण-प्रणाली की ओर इशारा करता है।
भाव-युग्म, केंद्र–त्रिकोण–दुःस्थान–उपचय का ढाँचा, भावेश के संबंध, ग्रहों की भूमिका और शक्ति, तथा दशा–गोचर।
किसी भी भाव को पढ़ने की संपूर्ण विधि, नए पाठकों की सामान्य भूलें, काल्पनिक उदाहरण, और यह ईमानदार चर्चा कि ज्योतिष क्या बता सकता है और क्या नहीं।
अध्याय 25 में पुस्तक अब तक सीखी गई अवधारणाओं को एक औपचारिक और दोहराने योग्य पद्धति में व्यवस्थित करती है — चौदह-चरण बारह-भाव विश्लेषण विधि।
पुस्तक में काल्पनिक उदाहरण और तुलनात्मक विश्लेषण दिए गए हैं। हर उदाहरण चौदह-चरण विधि को संक्षिप्त रूप में लागू करता है, और जान-बूझकर कम-से-कम एक मिश्रित या अनिश्चित कारक शामिल करता है — ताकि विरोधाभासी प्रमाण को साथ रखने का अनुशासन दिखाया जा सके।
प्रशांत श्रीवास्तव का जन्म भारत के महान आध्यात्मिक केंद्रों में से एक काशी (वाराणसी) में एक शिक्षित, प्रतिष्ठित और संस्कारी परिवार में हुआ। परिवार धार्मिक था, लेकिन घर में ज्योतिष का कोई विशेष वातावरण या परंपरा नहीं थी। इसके बावजूद, जब प्रशांत लगभग 11 वर्ष के थे, तब परिवार ने उनके भीतर एक असाधारण क्षमता को अनुभव किया। वे लोगों और उनके जीवन से संबंधित ऐसी बातें बताने लगे, जो आश्चर्यजनक रूप से सही सिद्ध होती थीं।
वे केवल भविष्य की घटनाओं के बारे में ही नहीं बताते थे, बल्कि गहन आध्यात्मिक विषयों पर गंभीर चर्चा भी करते थे। उनकी क्षमताएँ इतनी असाधारण थीं कि लगभग 15 वर्ष की आयु तक परिवार और आसपास के लोगों के बीच वे एक वास्तविक बाल ज्योतिषी के रूप में पहचाने जाने लगे।
वर्षों के अध्ययन, ध्यान, आध्यात्मिक साधना और व्यक्तिगत अनुभवों के बाद प्रशांत ने एक अनूठी आध्यात्मिक साधना विकसित की, जिसे उन्होंने नाम दिया—“एस्ट्रो मेडिटेशन”।
वे ज्योतिष के वैज्ञानिक, तार्किक और व्यावहारिक पक्ष से विकसित ज्योतिषीय समाधान “प्रयोग” के लिए भी विख्यात हैं। उनके “Scientific Astrology” अर्थात वैज्ञानिक ज्योतिष के रूप का अनुभव इस बुक में भी कर सकते हैं।
पूरी पुस्तक हिंदी में है। कुछ तकनीकी शब्द कोष्ठक में अंग्रेज़ी में भी दिए गए हैं, ताकि आगे का अध्ययन आसान रहे।
यह एक डिजिटल PDF eBook है। भुगतान के बाद आप इसे डाउनलोड कर सकते हैं। कोई फ़िज़िकल पुस्तक भेजी नहीं जाती।
हाँ। भाग एक शून्य से शुरुआत करता है — कुंडली क्या है, राशि–भाव–लग्न का अंतर, और एक भाव को पढ़ने का मूल सिद्धांत। इसके बाद पुस्तक क्रमशः गहरी होती जाती है।
हाँ। भाग दो में प्रथम से द्वादश तक हर भाव का अलग अध्याय है — और हर अध्याय उस भाव के सामने वाले भाव, स्वाभाविक कारकों और संरचनात्मक वर्गीकरण की ओर भी ले जाता है।
नहीं। यही इस पुस्तक का केंद्रीय विचार है — भाग तीन भावों के आपसी संबंध, केंद्र–त्रिकोण–दुःस्थान–उपचय, भावेश, ग्रहों की शक्ति और दशा–गोचर पर है, और भाग चार इन सबको एक दोहराने योग्य विधि में बदलता है।
हाँ — अध्याय 27 में काल्पनिक उदाहरण और तुलनात्मक विश्लेषण दिए गए हैं। ये सभी उदाहरण केवल समझाने के उद्देश्य से बनाए गए हैं और किसी वास्तविक व्यक्ति से संबंधित नहीं हैं।
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हाँ। PDF किसी भी ऐसे मोबाइल, टैबलेट, लैपटॉप या डेस्कटॉप पर पढ़ी जा सकती है जिसमें PDF पढ़ने की सुविधा हो।
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नहीं। यह एक शैक्षणिक पुस्तक है जो ज्योतिष की पारंपरिक संरचना और व्याख्या-पद्धति समझाती है। ज्योतिषीय संकेतों को प्रवृत्तियों और संभावनाओं के रूप में देखा जाता है, निश्चित घटनाओं के रूप में नहीं। पुस्तक स्वयं अध्याय 3, 28 और 29 में इस सीमा पर खुलकर चर्चा करती है।
12 भावों के अलग-अलग अर्थ जानने से आगे बढ़कर यह समझिए कि वे एक-दूसरे से कैसे जुड़े हैं।